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आस्था का केंद्र भारत भारी शिव मंदिर सिद्धार्थनगर
November 30, 2019 • विशेष संवाददाता • राजनीति

जानिये  अपनी सांस्कृति और अपने शहर को  अभियान के तहत मार्तण्ड प्रभात समाचारपत्र  एक नया कालम शुरू कर रहा है जिसमे एक एक कर बस्ती मंडल के साथ अन्य धार्मिक  ,सांस्कृतिक महत्व के स्थल के बारे में जानकारी प्रकाशित की जाएगी।उसकी शुरुआत भरतभरी  शिव मन्दिर से हो रही है।

भारत भारी शिव मन्दिर (डुमरियागंज सिद्धार्थनगर ) उत्तर प्रदेश

भारतभारी मन्दिर बस्ती मण्डल का महत्वपूर्ण प्राचीन धार्मिक स्थल है।यह भगवान शिव का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है।

भौगोलिक स्थिति

भारत भारी मंदिर उत्तर प्रदेश राज्य के सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज ब्लॉक में स्थित है।यह स्थान सिद्धार्थनगर और बस्ती जिले की सीमा पर स्थित है।

यह जिला मुख्यालय नौगढ़  से पश्चिम की ओर 65 किलोमीटर ,डुमरियागंज से 05 किमी ,राज्य की राजधानी लखनऊ से 210 किमी  की दूरी पर स्थित है। मंदिर के चारो तरफ क्रमशः माधली (2 किमी), समदा (2 किमी), महुरा (4 किमी), औसान कुइयान (4 किमी), अजगरा (5 किमी)  गांव हैं। भारत भारी दक्षिण में रामनगर ब्लॉक उत्तर की ओर खुनियांव ब्लॉक, पूर्व की तरफ मिठवल ब्लॉक तथा दक्षिण की ओर रुधौली ब्लॉक है ।

मन्दिर का विस्तार 

भारत-भारी में स्थित शिव मन्दिर और उसके सामने स्थित तालाब, जो लगभग 16 बीघे क्षेत्रफल में है। यह सागर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भगवान शिव के नाम से संरक्षित किया जा चुका है।तालाब के किनारे हनुमान, रामजानकी और दुर्गा जी के मन्दिर स्थित है।

भारी मेला

2005 से मन्दिर की व्यवस्था देख रहे महंथ गिरिजेशदास जी  बताते है कि कार्तिक पूर्णिमा को यहां बहुत बडा मेला लगता है, जो लगभग एक सप्ताह चलता है, जिसमें लाखों दर्शनार्थी भाग लेते है। इसके अतिरिक्त चैतराम नवमी और शिवरात्रि के पर्व पर भी यहां मेला लगता है।

यह लगने वाला मेला भारी मेला के नाम से प्रसिद्ध है।

ऐतिहासिक महत्व

इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व भी है। इस मंदिर के बारे में पुराणों और ऐतिहासिक पुस्तकों में भी उल्लेख प्राप्त होता है।

यह स्थल कभी महाराज दुष्यंत के पुत्र भरत की राजधानी हुआ करता था। उस समय यहां बहुत बड़ा नगर हुआ करता था और इस जगह को भरत भारी कहा जाता था जो कालांतर में भारत भारी होगया।इसका सम्बन्ध द्वापरयुग से भी जोड़ा जाता है । कहा जाता है कि  पांडव के अज्ञातवास में आर्द्रवन से गुजरते समय उनसे मिलने भग्वान श्रीकृष्ण भारत-भारी गांव से ही गुजरे थे। यहां सागर में उन्होंने स्नान करने के बाद मन्दिर में जाकर पूजा अर्चना की।

यह भी किवदन्ती है कि इस मन्दिर की स्थापना भगवान राम के भाई भरत ने की थी।

राम और रावण के बीच युद्ध हुआ तो राम के भाई लक्ष्मण जब मुर्छित हो गये थे तो हनुमान जी संजीवनी बूटी भारत-भारी होकर ले जा रहे थे, जिन्हें देखकर भरत ने उन्हें राम का कोई शत्रु समझकर तीर मारा और हनुमान पर्वत लेकर वहीं गिर पडे, वहां गड्ढा हो गया जो तालाब के रूप में परिवर्तित हो गया। हनुमान को देखकर भरत को पछतावा हुआ और उन्होंने यहां शिव मंदिर की स्थपना करायी।

ऐतिहासिक प्रमाण

बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय के प्राचीन इतिहास पुरातत्वविद श्री सतीश चन्द्र ने भारत भारी का स्थलीय निरीक्षण करके मूर्तियों, धातुओं, पुरा अवशेषों के अवलोकन के बाद इसके ऐतिहासिक स्थल होने की पुष्टि की है।

प्राचीन टीले और कुएं के नीचे दीवालों के बीच में कहीं-कहीं लगभग 8 फीट लम्बे नरकंकाल मिलते हैं, जो इतने पुराने होने के कारण इस स्थिति में हो गये हैं कि छूने पर राख जैसे विखर जा रहे है। भूमिगत पुरावशेषों से इसके आलीशान नगर होने की पुष्टि होती है।इससे भी होती है कि किले के नीचे तमाम ऐसी नालियां हैं, जो आपस में जुडकर अन्त में जलाशय से जुड़ गयी है। पुरातत्व विभाग ने कुषाण काल के ऐतिहासिक स्थल के रूप में 10 वर्ष पहले इसे सूचीबद्ध किया है। भारत-भारी एक ऐतिहासिक पौराणिक स्थल है, जिसे एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है

वर्तमान महंथ श्री गिरिजेशदास जी  ,जो कि पूर्व  ब्रह्मलीन महंथ आर0के0 परदेशी बाबा के शिष्य और उत्तराधिकारी है बताते है कि मंदिर प्राचीन और सिद्धस्थल है।यह पर मागी गई कामनाये जरूर पूरी होती है।आसपास के लोग अभिषेक और विशेष पूजा के लिए भी आते है।

विवाद

मंदिर में आलकल आधिकार को लेकर कुछ विवाद चल रहा है। महंथ जी बताते है कि आजकल मंदिर को लेकर कुछ लोग विवाद कर रहे है।जिसकी वजह से सिद्धार्थनगर प्रशासन ने मंदिर की कुटी में ताला लगा दिया है।