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मैं पंकज तिवारी हु, अल्ला कसम मैंने पत्थर नही मारा
December 23, 2019 • संवाददाता • करोना वायरस

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नाम पर हिंसक प्रदर्शनों के पीछे की मंशा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। समुदाय विशेष के लोगों को भड़काने की बातें भी सामने आई है। हिंसा का दोष हिंदुओं और भाजपा के मत्थे मढ़ने की कोशिश भी हुई है।

इसी कड़ी में गोरखपुर से एक घटना सामने आई है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद यहॉं हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान पुलिस ने एक पत्थरबाज को पकड़ा। पुलिस को झॉंसा देने के लिए उसने अपना नाम पंकज तिवारी बताया।

 बवाल पर काबू पाने के बाद पुलिस पत्थरबाजों की धर-पकड़ में जुटी थी। इसी क्रम में संदेह की स्थिति में उन्होंने एक युवक को रोका। पूछने पर उसने अपना नाम पंकज तिवारी बताया। जब उससे पिता नाम पूछा गया तो थोड़ी देर सोचने के बाद उसने गौरी तिवारी बताया।

हालॉंकि एक पुलिसकर्मी ने उसे पत्थर फेंकते देखा था। उसने कहा- साहब यह भी पत्थरबाजी कर रहा था। पथराव करते इसे मैंने खुद देखा है। सिपाही ने जैसे ही यह बात कही खुद को पंकज तिवारी बताने वाला युवक बोल पड़ा- 

      अल्लाह कसम मैं पत्थर नहीं चला रहा था। 

और इस तरह सच्चाई सामने आ गई।

साजिशन भड़काया गया था दंगा--- 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर में हिंसा भड़कने के पीछे बाहरी लोगों का हाथ होने का संदेह भी है। बताया गया है कि शुक्रवार की सुबह से ही शहर के शाहमारूफ इलाके में युवकों का कुछ समूह सक्रिय था। पहले इन्होंने दुकानें बंद कराई फिर काली पट्टी लगाकर नमाज अदा करने का फैसला किया। ये युवक एक-दूसरे के हाथ में काली पट्टी बॉंधने लगे। पुलिस ने इन पर नजर बना रखी थी। बाद में ये युवक जामा मस्जिद के पास भी लोगों को काली पट्टी बॉंधते दिखे।

यह देख एलआइयू की टीम ने अधिकारियों को एक रिपोर्ट भेजी थी। इसमें कहा गया था कि कुछ बाहरी युवक लोगों को काली पट्टी बॉंध भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। तय किया गया कि नमाज के बाद ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। लेकिन, उससे पहले ही बवाल शुरू हो गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस की जॉंच से यह बात सामने आई है कि बाहरी तत्व पिछले कई दिनों से कुछ खास व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डालकर गोरखपुर के युवकों के संपर्क में थे। कुछ युवकों को फोन कर भी उकसाया गया था। बाहरी लोग सीएए पर दूसरे शहरों में हुए बवाल का हवाला देकर लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। जॉंच में यह बात भी सामने आई है कि पत्थरबाजी के लिए ऐसी ईंटे जमा की गई थी जिसे थोड़ी सी ऊंचाई से गिराने पर भी कई टुकड़े हो जाएँ ताकि पथराव के दौरान उनका आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।